ताजा प्रविष्ठियां

Wednesday, April 29, 2009

जूते से कैसे बचें….?

बहुत बड़ी समस्या है !
गोली से बचने के लिए तो बुलेट-प्रूफ कपड़े पहन लेते हैं ।
पर ,
जूतों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं जिसे पहना या ओढा़ जा सके ,
क्योंकि ये शरीर के साथ-साथ इज्जत पर भी हमला करता है ।
इसीलिए तो फैंक कर मारो न मारो केवल उछालना ही बहुत है ,
बाकि काम न्यूज चैनल वाले कर देंगे ,उन्हें भी तो उछालने के लिए
कुछ चाहिए । नेताओं ने कितनी इज्जत कमाई है ये भी पता चलता है।
जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विचारों के लिए चाहिए वैसे ही जूता मारने के लिए भी
स्वतंत्रता की मांग न होने लगे ।

Saturday, April 18, 2009

हिंदू-सभ्यता

हाँ, मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ,
भारत मेरा जन्म स्थान,भारतीय मेरी पहचान है।
कभी आर्यावर्त के कारण आर्य ,
और अंग्रेजों के समय से इंडियन भी मैं ही हूँ ,
मैं प्रथम हूँ, प्राकृतिक हूँ,सास्वत हूँ॥

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ,
मेरे पूर्वजों ने मुझे वैदिक साहित्य,रामायण
महाभारत और गीता जैसे कई ग्रन्थ दिए, और,
श्रीराम,कृष्ण,महावीर,गौतम बुद्ध,गुरु गोविन्द सिंह
जैसे कई चरित्र दिए,अनुसरण करने को,

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ,
मेरे पूर्वजों ने कभी भी मेरे विस्तार के लिए,
किसी को प्रलोभन नहीं दिया न किसी के प्राण लिए,
बल्कि,अपने पर हमला करने वालों के कई खून माफ़ किए
यही हमारे महापुरुषों ने उपदेश दिए।

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
दुनिया के सभ्य होने से पहले सुसंस्कृत और सभ्य हूँ,
नारी रूपी आदि शक्ति, का उपासक हूँ,
सीता-सावित्री,मैत्रेयि,कात्यायनी,मीरा और लक्ष्मीबाई जैसे
चरित्रों में सबके लिए आदर्श चरित्र मानता हूँ।

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता
सारे संसार में केवल मेरी ही अवधारणा है,
प्रकृति और पर्यावरण का उपासक भी केवल मैं ही हूँ,
मैं सम्पूर्ण हूँ मुझ में सब,सब में मैं हूँ।

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
प्राकृतिक हूँ इसलिए सब में मेरा ही अंश है,
मैं सभ्यता हूँ मैं ही संस्कृति और धर्म हूँ ,
जिन्होंने मुझे जाना उनके अनुसार मैं ही,
सम्पूर्ण चराचर जगत का मर्म हूँ।

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
पृथ्वी पर पाप,अनाचार,अत्याचार न बढ़ें
इसलिए पाप-पुण्य और पुनर्जन्म भी मेरी अवधारणा है,
अमर होते हैं आत्मा और परमात्मा मैंने ही सिद्ध किए,
अमरत्व के लिए न जाने कितने सूत्र दिए॥

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
मैं मूर्त और अमूर्त दोनों का उपासक हूँ
मानूं तो पथ्थर और कण-कण में भगवान मानूं,
न मानूं तो, सारी दुनिया को श्मशान मानूं।
हाँ सच, मैं स्वतंत्र हूँ, बाध्य नहीं हूँ ,

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
गीता,गंगा,गाय और गायत्री मेरे लिए पूजनीय हैं
मैं श्रद्धा हूँ पर तार्किक हूँ, मैं मार्मिक हूँ,
संवेदनशील मैं,चिन्तनशील, मैं, सहनशील भी हूँ,
इसी लिए आदि से अनादि कि ओर निरंतर गतिशील भी हूँ।

हाँ मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ।
मातृ देवो भव-पितृ देवो भव आचार्य देवो भव और,
अतिथि देवो भव, गुरु: ब्रम्हा,गुरु: विष्णु गुरु: देवो महेश्वर: ,
केवल मेरी ही मान्यताएं हैं मैं पारंपरिक भी हूँ,

Thursday, April 16, 2009

“पद्मश्री पुरस्कार”

धौनी और भज्जी पुरस्कार लेने नहीं गए।
पता नहीं ,
पुरस्कार लेने वालों ने पुरस्कार का अपमान किया,
या
पुरस्कार देने वालों ने पुरस्कार का मान नहीं रखा।
पिछले कुछ समय से जिस तरह से सभी पुरस्कार
किसी को भी दे दिए जा रहे हैं, उससे इनका मान कम ही हुआ है।
धौनी और भज्जी ने बता दिया कि जिस के लिए उन्हें पुरस्कार दिया
जा रहा है उसकी एवज में वह पहले ही बहुत वसूल रहे हैं।
इन पुरस्कारों को वास्तव में जिन्हें मिलना चाहिए उन पर तो नजर
ही नहीं जाती ।

Wednesday, April 15, 2009

"सोने का बैट"

सचिन को साढे चार किलो का सोने का बल्ला भेंट किया गया।
किसलिए….?
उनको सम्मानित करने के लिए ,
क्या मतलब…?
वो तो वैसे ही बहुत सम्मानित हैं।
मतलब,
और ज्यादा सम्मान देने के लिए ,
क्या मतलब…?
वो अभी तक कम सम्मानित थे क्या?
नहीं- नहीं…..
जैसे….. जैसे लोग मन्दिर में भगवान को पैसे और गहने भेंट करते हैं वैसे ही,
ऐसे तो……
ज्यादातर लोग मंदिरों में जाते तो हैं पर पैसे भेंट नहीं करते हैं,भगवान के लिए सम्मान भी रखते हैं।
मतलब….
जो खेत पहले से ही हरा-भरा हो उसमे और बीज डाला जाए तो कोई फायदा नहीं होता।

Tuesday, April 14, 2009

हमारे प्रधान मंत्री का स्वाभिमान जागा

जी हाँ पिछले कुछ दिनों से एक बात पर कोई ध्यान
नहीं दे रहा ,न कोई न्यूज चैनल न ब्लौगर न पत्र-
पत्रिकाओं वाले,कि हमारे प्रधान मंत्री डॉ.मनमोहन
सिंह (सिंह इज किंग)का स्वाभिमान जाग उठा है। पिछले पॉँच
साल में हमने उन्हें कभी भी अपनी राष्ट्र भाषा या
मातृ भाषा में बोलते नहीं देखा ,लेकिन अब शायद उनका
स्वाभिमान जाग गया है ,बस दो-चार दिन हुए हैं, वह
हिन्दी में बोलने लगे हैं। भगवान उनका स्वाभिमान बनाये रखे ।
और कुछ दुसरे लोगों को का स्वाभिमान भी जगे।

राहुल गाँधी
राहुल गाँधी के पास न कार न घर (एक समाचार )
कैसे होगा घर और कार क्योंकि काम धंधा तो कोई
है नहीं पापा-मम्मी ने भी शायद कभी काम किया होगा तो
इतना धन जमा नहीं किया होगा कि बेटा अपना घर बना सके
वो तो किस्मत वाले हैं कि हिंदुस्तान में पैदा हुए(आ गए)
यहाँ के लोग इतने दयालु होते हैं कि स्वयं चाहे गटर के
पाईप में रहें लेकिन अपने नेताओं के लिए आलिशान बंगले बना रखे
हैं उन्हें कार या कई कारें दे रखी हैं । ऐसे में कोई करोड़
पति भी हो तो लालच हो ही जाएगा। अपना घर कोई क्यों बनाएगा ।

Sunday, April 12, 2009

उत्तराखंड में चुनाव

उत्तराखंड में चुनावी मुद्दे प्रत्यक्ष में कुछ नहीं हैं।
हाँ ;
जिस पार्टी ने जितने ज्यादा गरीब बनाये होंगे उसके उतने ज्यादा वोट।
नहीं समझे न , भई गरीब बनाने का मतलब , “बी.पी.एल राशन
कार्ड बनाना”
अभी भी नहीं समझे ; अरे भाई कोई गरीब हो न हो
राशन कार्ड गरीबी रेखा से नीचे वाला बन जाएगा , अगर आप किसी
भी एक पार्टी से जुड़े हों तो ,
अब समझ गए न.और ऊपर पहाड़ में
ज्यादातर दो ही पार्टियों का बोलबाला है.
एक और मुद्दा, जिसने ज्यादा राहत राशि बांटी होगी , वास्तव में जरुरतमंद
को मिले न मिले पर अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों को जरुर मिलनी चाहिए
आप कहेंगे ऐसा कैसे हो सकता है,
एन.डी.तिवारी जी,बी.सी.खंडूरी जी जैसों के
राज में,
अरे महाराज ये हिंदुस्तान है उसमे भी फ़िर ये उत्तराखंड है। यहाँ
कुछ भी हो सकता है।
यहाँ जो भी सरकार बनती है वह काफी संवेदनशील होती है अब ये अलग बात
है की सरकार बनने के बाद आम जनता का जोश तो ठंडा पड़ जाता है
इनके कार्य-
कर्ताओं का जोश दोगुना-चौगुना हो जाता है। इसीलिए ऊपर से आदेश हो जाते हैं
कि कार्यकर्ताओं (ठेकेदारों)को ही ठेके दिए जायें ,
कार्यकर्ताओं के कार्यकर्ताओं
को, काम उपलब्ध करवाना छोटी इकाईयों का काम है। ऊपर से तो ये आदेश हो जाते

हैं कि येन केन प्रकारेण हमारे आदमियों को काम मिलना चाहिए.इसीलिए तो कहीं
पानी हो न हो पर सिंचाई गूल बन रही है,नदी या नाला सूखा है पर उस पर पुल बन
जा रहा है क्योंकि इन पार्टियों के आदमियों को काम देना है।
योजना बद्ध तरीके से
काम होता है,
अगर कार्यकर्ताओं को लाभ ही न हो तो सरकार का क्या लाभ। अब जो बड़े या
छोटे ठेके ले सकते हैं
उन्हें ठेके दो, जो कुछ नहीं कर सकते उन्हें राहत
कोशों से उनकी हैसियत के अनुसार राशि का इंतजाम करवा दो बस,
यही राजनीति उत्तराखंड
में चल रही है। इसी तरह बड़े नेताओं ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं करके शिलान्याश कर
दिए डिग्री कालेज ,आई. टी. आई. हौस्पिटल , व स्कूल सब जगह यही हाल है कहीं ठेकेदारों
नेताओं-अधिकारियों की मिलीभगत से जरुरत न होने पर भी ये बन गए।
(जहाँ जरुरत है वहां

कोई बड़ा ठेकेदार नही है इसलिए नही बने) , अब उनमे स्टाफ
नहीं है। क्षेत्रीय पार्टियाँ भी इन्हीं की भाषा बोलती हैं।

Saturday, April 11, 2009

शराब

“जहरीली शराब”..........!
क्या बिना जहर की भी शराब होती है ?
भई जहर तो सारी शराब में होता है।

जिसमें कुछ ज्यादा हो जाता है ,तो तुंरत
आदमी मरने लगते हैं
और कम जहर
वाली शराब से दस-बीस साल में अन्दर से गल-गल कर
मरते हैं।
(
जो ज्यादा खतरनाक है)।

Wednesday, April 8, 2009

जरनैल सिंह

पत्रकार है तो क्या हुआ,
क्या आदमी नहीं रहा….?
मंत्री है तो क्या हुआ,
व्यवस्था का चेहरा ही तो हुआ।

ये आम आदमी का जूता व्यवस्था के मुहं पर उछला है,
तो, शर्म व्यवस्था को और व्यवस्थापकों (नेताओं-अधिकारीयों)
को आनी चाहिए कि उन्होंने ऐसी स्थिति पैदा की।
आम आदमी की नजरों में वे गिर चुके हैं ।
एक पत्रकार की कलम शर्म वालों के लिए होती है,
बेशर्मों पर कोई असर नहीं होता।

Tuesday, April 7, 2009

काला धन

बाबा रामदेव पिछले छह माह से स्विस बैंकों में जमा काले धन के बारे में बोल रहे हैं,
जिसका असर शायद अब पड़ा है।
इसी तरह उनके अन्य मुद्दों को भी सर झुका कर मानना ही नहीं पड़ेगा हल भी करना होगा।
आख़िर देश की जनता बाबा के साथ है और जनता का दबाव ही तो नाक रगड़ वाता है।
स्वदेशी का अभियान, एकता का अभियान, विदेशी कम्पनियों के बहिष्कार का अभियान,
सौ प्रतिशत मतदान का अभियान और भ्रष्टाचार ख़त्म करो अभियान भी उन्होंने चलाया हुआ है।
इस बार के चुनाव में ही बहुत बदलाव हो जाएगा ।

ऐसा नेताओं की बौखलाहट देख कर लग रहा है।

क्यों दूँ - किसको दूँ.... वोट...?

समझ नहीं आता क्यों और किसको दूँ वोट
कांग्रेस का हाल देखना है तो दिल्ली का हाल देख लो,
मीडिया कितना ही अच्छा बताये पर आनंद विहार बस
अड्डे पर ही गंदगी को देख कर लगता है दिल्ली में सरकार
नाम की चीज नहीं है।बस अड्डे से बाहर भी यही हाल है,
लोग कैसे अपना वोट वापस लें,पता नहीं।
अब भाजपा का हाल देखना हो तो उत्तराखंड के बुरे हाल देख
कर मन नहीं करता की इन्हें वोट दूँ।
ये तो देश की दो मुख्य पार्टियों की बात हो गई,
बाकी तो थाली के बैंगन की तरह हैं।
थूक-थूक कर चाटते हुए, वो भी बेशर्मी से, इन थाली के बैंगनों
को देखा है।
मैं तो हमेशा वोट देता हूँ , पर मेरा वोट बर्बाद करते हैं वो, जो,
जाति के लिए वोट देते हैं , जो पैसे लेकर-शराब पी कर वोट देते हैं।
असल में इस देश में भूखे-नंगों से ज्यादा हराम की खाने वाले हैं।
जो नेताओं और पार्टियों की जयकार बोलने की एवज में दलाली करते हैं।
देश की- जनता की किसे पड़ी है,
भूखे-नंगे तो चलो पेट भरने के लिए
पैसे लेकर वोट देते हैं
पर क्या कहें उनको, जो जाति के नाम पर वोट देंगे,
इनके नेता इनको थोक में नौकरी देंगे।
कोई योग्य हो या न हो।
मेरा वोट तो बर्बाद ये करेंगे एक विचारधारा की सरकार नहीं बनने देंगे
इनके थूकचट्टे नेता तब अपना थूका हुआ चाट कर बड़ी पार्टियों से सौदा कर लेंगे।

लालू यादव

लालू प्रसाद यादव……"अगर मैं गृह मंत्री होता तो……छाती पर रोलर चलवा देता"
(शुक्र है प्रधान मंत्री होता तो…. नहीं बोला….. दौड़ में एक और शामिल हो जाता। प्रधान मंत्री के लिए रोलर से भारी चीज भी मिलना मुश्किल था)
खैर,लालूजी इसीलिए तो आप गृह मंत्री नहीं हैं, मुख्य मंत्री रहते हुए आपको देख लिया है।
मुम्बई में पिट-पिट कर भी बिहारियों को अक्ल नहीं आई होगी तो तभी आप आगे से कुछ होंगे वरना तो शायद अक्ल आ गई होगी। आप आगे से कुछ भी नहीं होंगे ।

Monday, April 6, 2009

मेरा भारत महा.....



ये स्वतंत्र हिंदुस्तान है,
यहाँ लोकतंत्र है, जनतंत्र है, प्रजातंत्र है।
गणतंत्र है,
यहाँ कानून का राज होता है
एक महामहिम होता है ,
उसका एक प्रधान मंत्री होता है
और कई सारे मंत्री-उप मंत्री होते हैं।
पर सबके सब बुरा न देखने-सुनने की
कसम खा लेते हैं ।
यहाँ कई तरह के न्यायलय व न्यायाधीश हैं
पर सबके सब हुक्म के गुलाम हैं।

समाचार पत्र का फोटो लगा रहा हूँ ।
मेरे पास सक्षम उपकरण न होने के कारण
साफ नहीं आया ।

चुनाव आयोग

गुड़ से परहेज करे , गुलगुले खाए।
(प्रत्यक्ष पर बबाल,परोक्ष को छूट)
नेताओं के सौ-पचास रूपये बाँटने
पर तो आग-बबूला हो जाता है,
जबकि,
पार्टी के घोषणा पत्र में और पोस्टरों
में कई गुना ज्यादा का लालच देने की छूट
इनको चुनाव आयोग ने ही दी हुई है।
और ये उसका इस्तेमाल भी करते हैं,
सस्ते अनाज व अन्य चीजों का लालच देते हैं।
क्या इस तरह के लालच से सही वोट पड़ता होगा.....
तो ये चुनाव आयोग का गुड़ से परहेज नहीं है ?

Thursday, April 2, 2009

"हिंदुस्तान जाग रहा है"

नई आजादी नई व्यवस्था, के लिए
भारत का स्वाभिमान जाग रहा है।
नींद का बहाना करके सोने वालो ,
देखो तो जरा, "स्वामी रामदेव की पुकार" से
सारा हिंदुस्तान जाग रहा है॥

जैसे उल्लू,चमगादड़ और अन्य निशाचर जीव,
सूरज के प्रकाश से चुंधिया कर,
आँखें बंद कर रहा है,
हमारे यहाँ का मीडिया,और
सब कुछ दिखाने वाले चैनल,
नैतिकता की दूसरो से ,अपेक्षा करने वाला
बुद्धिजीवी और पत्रकार,
बाबा रामदेव के इस आह्वान से
आख़िर क्यों डर रहा है ?

Wednesday, April 1, 2009

एक अप्रेल ही क्यों

अप्रेल-फूल उनके लिए जो साल भर मूर्ख नहीं बनते,
हम तो साल भर फूल(मूर्ख)बनते हैं।
1 अप्रेल से उसकी शुरुआत हो जाती है।
जैसे वित्तीय वर्ष आरम्भ हो जाता है।
(जनता को आंकडों द्वारा मूर्ख ही तो बनाया जाता है
कर्मचारी वेतन बढ़ने पर भी नहीं समझ पाता कि कैसे
वापस देना पड़ता है महंगाई बढ़ने पर और टेक्शों में )
जैसे शिक्षा सत्र भी आज से ही आरम्भ होता है।
(इस शिक्षा से ही देश का ये हाल हो रहा है,अब तो पब्लिक
स्कूल वाले जैसे मूर्ख बना रहे हैं ,सब केवल देख पा
रहे हैं, कुछ कर नहीं पाते। क्योंकि उन्हें भी वही शिक्षा मिली है)
और भी कई तरह से हम मूर्ख बनते हैं,
मोबाईल कम्पनियों द्वारा, फिल्मों द्वारा,नेताओं द्वारा,विज्ञापनों द्वारा ,
अन्य भी हैं।
सच पूछो तो जिंदगी अपनेआप में मूर्खता है,
पैदा हुए,पता नहीं क्यों हुए,जिंदगी गुजारी और मर गए पर

ये पता नहीं चल पाया कि आख़िर पैदा क्यों हुए।