उनका भाग्य ! जो देश की महान जनता ने ये अवसर उन्हें सौंपा । क्योंकि किसी को भी ये अवसर मिलता वोभी वही करता जो इन्होने किया है ।

फिर ; ये तो बेचारे अंग्रेजों के वंशज, कैसे अपने खून को लजा सकते हैं ? इन्होने तो लूटने (भ्रष्टाचार) के मामलेमें उनसे भी अधिक तरक्की कर ली है । उनकी केवल चमड़ी का रंग सफ़ेद था,

पक्के "विकासवादी" हैं । कुछ तो छूटता इनसे; जिसका विकास न हुआ हो । अब ये अलग बात है कि विकास “नकारात्मक-सकारात्मक” कहीं को भी हुआ; हुआ तो सही । आज हम इस लायक तो बने कि; ‘ जिन अंग्रजों से उनके जातेसमय हमारे नेताओं ने वादा किया था कि हम भारत को उनके नक्शेकदम पर ले जाते हुए, भारत में कभी भीभारतीयता नहीं पनपने देंगे ’ उन्हें अपने यहाँ की तरक्की दिखाने के लिए, और हम कितना उनके एहसानमंद हैं

सदा इस प्रयास में लगे रहते हैं कि अंग्रेजियत यहाँ से कहीं मिट न जाये । इसलिए आओ तुन्हीं उदघाटन करोहम अपनी महामहिम को समझा लेंगे वह आपको देख-देख कर ही निहाल होती रहेंगी । देखो ! हम अभी भीनहीं बदले हैं तुम्हारी जी हजूरी करने में हमें अभी भी आनंद का अनुभव होता है ।
उत्तम व्यंग्य !
ReplyDeleteनवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
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