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Monday, April 12, 2010

अब समय आ गया, कि एक सूचि बनाई जाये ...या ब्लॉग बनाया जाये नाम रखा जाये "भारत के कलंक" ताकि सनद रहे | ब्लोगर के लिए विचारणीय

कई दिन से मेरे मन में ये बात चल रही थी हमारे बहुत से ब्लोगर मित्र बहुत प्रवीण हैं कंप्यूटर विज्ञान में और ब्लोगिंग में, जैसे- अपने सुरेश चिपलूनकर जी हैं, विकास मेहता जी हैं, फिरदौस जी हैं ,एम वर्मा जी हैं, अलबेला जी हैं, महेंद्र मिश्र जी हैं, पी. सी.गोदियाल जी हैं, समीरलाल जी हैं, वाचस्पति जी हैं , एल आर गाँधी जी हैं,पं. डी के वत्स जी हैं, परमजीत बाली जी है ,  हिंदी मीडिया है, भारती नागरिक है, देश की माटी है, पाबला जी हैं, और भी बहुत से हैं जिनके नाम मुझे ध्यान नहीं पर वे भी देश भक्ति में कम नहीं और इस कार्य को सुगमता से कर सकते हैं |निज गौरव का नित ज्ञान रहे , हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे |
सब जाय अभी पर "मान" रहे , मरणोत्तर गुंजित गान रहे |
कुछ हो  न तजो निज साधन को , नर हो न निराश करो मन को |
                                                                                    मैथिलीशरण गुप्त
जिसको  नहीं निज देश- गौरव का जरा भी ध्यान है
वह नर नहीं, नर पशु निरा है,और मृतक सामान है || 
                                                                                     मैथिलीशरण गुप्त
लेकिन हमारे भारत में बहुत से लोग इन बातों को बकवास समझते हैं, कुछ लोग ही नहीं; कुछ मीडिया वाले कुछ पत्रकार कुछ स्वयंभू बुद्धिजीवी, जिन्हें हिन्दू राष्ट्रीयता के नाम से ही घृणा है | इनका तर्क है कि इसमें हिन्दू शब्द धार्मिकता और साम्प्रदायिकता का  प्रतीक है | पर ये भारतीयता के क्यों विरोधी हैं  ? इसका जवाब इनके पास नहीं हैं |
ये स्वयं तो सरकार की आड़ से और कानून का संरक्षण लेकर जो बकना चाहें वो बक सकते हैं या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अपने को पाक-साफ़ दिखाते हैं, नक्सलवादियों, आतंकवादियों का समर्थन करने में इनको लाज नहीं आती पर जब कोई अतिवादी हिन्दू संगठन कहीं संस्कृति के नाम पर जब थोड़ी सी ज्यादती कर देता हैं तो ये निर्लज्ज लोग पुरे धर्म-संस्कृति  व सभ्यता को नीचा दिखाना अपना कर्तव्य समझते हैं |
रविवार (११ -४- १०) को एक साक्षात्कार (अमर उजाला) में पढ़ा कोई दूधनाथ सिंह हैं उसका निचोड़ यह है कि "तुलसी दास जी" ने जो "रामचरित मानस" ग्रन्थ लिखा, उसके कारण हिन्दू समाज खास कर उत्तर भारत की "काऊ बैल्ट", 'ये नाम उन्होंने ही लिखे हैं, प्रभावित हैं | और ये अपने सब संबधों का व्यव्हार उसी से तय करते  हैं, "जिसे ये साहित्यकार सही नहीं मानते" इससे भी अधिक इनका ये मानना है कि तुलसीदास  हुए  तभी बाबरी विध्वंस हुआ मैं उस साक्षात्कार का चित्र भी दे रहा हूँ मेरा कैमरा अच्छा नहीं है वरना पूरा देता; पर मुख्य-मुख्य हिस्से दे रहा हूँ , अब इसे कौन सी मानसिकता कहें  ? ये मानसिकता हिन्दू विरोधी तो है; ही देश विरोधी भी है, वास्तविकता विरोधी भी है, राष्ट्रीयता विरोधी भी है, यही मानसिकता है जो नक्सलवादियों का, आतंकवादियों का, बलात्कारियों का (फांसी की सजा का विरोध-मानवीयता की आड़ में ) समर्थन करती है |
ये हमारे सुरक्षा बालों का मनोबल तोडती है, हमारे युवाओं को दिग्भ्रमित करती है, और इस मानसिकता वाले बेशक कम मात्रा
में हैं पर हर जगह हैं विज्ञापनों में, समाचारों में, साहित्यकारों में, चित्रकारों में, कलाकारों में,राजनीति में, समाज सेवियों में,और समाज में भी | जी हाँ ये केवल मानसिकता की ही बात तो है, "इसे मानसिक रोग भी कह सकते हैं"; कह सकते है क्या "ये होता ही मानसिक रोग है; जो केवल एक धर्म या एक राष्ट्र या एक सभ्यता-संस्कृति के विरुद्ध हीन भावना है" | ये सोच प्रकृति की विरोधी होती है शायद ! इसे तभी "वामपंथी" सोच या विचारधारा धारा कहा जाता है | वरना; जिस साक्षात्कार का मैंने उल्लेख किया है, उस को व्यक्त करने का और छापने का दूसरा तरीका भी हो  सकता था जो प्राकृतिक होता, जैसे ये यह भी कह सकते थे या छाप सकते थे कि अगर बाबर नहीं आता या उस समय मंदिर नहीं तोड़ता तो आज भी बाबरी विध्वंस नहीं होता |
यह  सत्य होता; पर सत्य बोलने व लिखने के लिए स्वस्थ मानसिकता चाहिए , अगर ये स्वस्थ मानसिकता वाले होते तो इन्हें वामपंथी क्यों कहते; वाम पंथी का अर्थ ही उलटे रास्ते पर चलने वाले होता है, उलटी सोच वाला होता है | इसी तरह कुछ दिन पहले किसी न्यायाधीश ने लिव इन रिलेशन सिप के लिए कृष्ण का उदहारण दिया 
था |


तो दोस्तो ! ऐसे लोगों को पहचान कर एक सूचि बनाने की आवश्यकता है, ये लोग भारत में अधिक मात्रा नहीं हैं फिर भी हर जगह दीखते हैं | आप सोचेंगे कि सूचि बनाने से क्या होगा, इनका नाम और कर्म उस सूचि में; और वह सूचि किसी ऐसे नाम के  ब्लॉग के रूप में बना दिया जाये जो इनके कर्मों और विचारों को चरितार्थ करे | और जब भी ब्लोगों का इतिहास बने इस बात की सनद रहे कि इन लोगों के कर्म और विचार कैसे थे | इसका लाभ यह होगा; जैसे आजादी के बाद बहुत से ऐसे लोग अपने को स्वतंत्रता सेनानियों की संतानें मनवाने सफल रहे; क्योंकि उनका कोई इतिहास नहीं था या कोई सूचि नहीं थी |
अगर थी भी तो उनके कुकर्मों और विचारों का किसी को पता नहीं था | 
अब जो सूचि या ब्लॉग की बात मैं कर रहा हूँ उसका नाम रखा जाये "भारत के कलंक" पुरुष, महिलाएं व संस्थान | इस ब्लॉग में सबको 'जो राष्ट्रभक्त हैं' लिखने का अधिकार दिया जाये और सबकी ये जिम्मेदारी हो कि जब भी इनकी किसी नीचता का पता लगे इनको इस ब्लॉग पर सूचि बद्ध करे . 
दरअसल मुझे कंप्यूटर के विषय में इतनी जानकारी नहीं है कि मैं कोई सुविधा जनक तरीके से इस कार्य को अंजाम दे सकूँ इसलिए कई दिन से मेरे मन में ये बात चल रही थी हमारे बहुत से ब्लोगर मित्र बहुत प्रवीण हैं कंप्यूटर विज्ञान में और ब्लोगिंग में, जैसे- अपने सुरेश चिपलूनकर जी हैं, विकास मेहता जी हैं, फिरदौस जी हैं ,एम वर्मा जी हैं, अलबेला जी हैं, महेंद्र मिश्र जी हैं, पी. सी.गोदियाल जी हैं, समीरलाल जी हैं, वाचस्पति जी हैं , एल आर गाँधी जी हैं,पं. डी के वत्स जी हैं, परमजीत बाली जी है ,  हिंदी मीडिया है, भारती नागरिक है, देश की माटी है, पाबला जी हैं, और भी बहुत से हैं जिनके नाम मुझे ध्यान नहीं पर वे भी देश भक्ति में कम नहीं और इस कार्य को सुगमता से कर सकते हैं |
क्योंकि मेरा मानना है कि किसी आतंकवादी से या किसी नक्सलवादी से अधिक "ये कलंक" देश के लिए हानिकारक हैं और इनका हम मुहं बंद नहींकर सकते तो क्यों न इनको आने वाली पीढ़ियों के लिए सूचि बद्ध कर दिया जाये, "ताकि सनद रहे"
कि ये कितने असुर थे इनके जो आने वाली पीढियां होंगी वे या तो शर्मिंदा होंगे या प्रायश्चित तो करेंगे | इस कार्य को करना इसलिए भी जरुरी है कि इनका साथ इनके भाई जो मैकाले पुत्र हैं और इतिहास लिखने वाले बने हुए हैं इनको महिमामंडित करके आने वाली पीढयों के आदर्श के रूप में प्रस्तुत करते हैं | जो देश और समाज के लिए घातक होगा |

6 comments:

  1. लो क सं घ र्ष.nice

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  2. सही कहा आपने, मेरा तो बस सीधा सा यही जबाब इन छद्म सेक्युलरों को रहता है कि हम ईंट का जबाब पत्थर से देंगे !

    वक्त नहीं मिलता नहीं तो मैं तो इस मूड में था कि एक ऐसा ब्लॉग चालू किया जाए जिसमे इन भ्रस्ठ सेक्युलरों के कारनामो और पूरे खानदान की जन्मपत्री/ कर्मपत्री भविष्य के लिए संजो कर रखी जाए !

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  3. अच्छा है,होना भी चाहिये.

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  4. आपके विचारों से पूर्णत: सहमति है...इस विषय में यदि किसी भी तरह की मदद/परामर्श/योगदान की आवश्यकता अनुभव करें तो आप निसंकोच कह सकते हैं.....

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