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Friday, November 11, 2011
इस हल्ले और होड़ के कारण कितने ही बच्चे समय से पहले पृथ्वी पर आ जायेंगे
Tuesday, November 8, 2011
कुछ दोस्त हमारे; हमसे कतराने लगे हैं, “मतलब” देशभक्ति का; जो हमने बता दिया ॥
कुछ दोस्त हमारे; हमसे कतराने लगे हैं,
“मतलब” देशभक्ति का; जो हमने बता दिया ॥
Sunday, November 6, 2011
कांग्रेस के पीछे कौन है ?
स्वामी रामदेव के पीछे भाजपा और संघ का हाथ !
अन्ना हजारे के पीछे भाजपा और संघ का हाथ !
एक बड़ा सवाल
कांग्रेस के पीछे किसका हाथ ?
हमें जो समझ आ रहा है वो यह है कि; इस अ राष्ट्र वादी कांग्रेस के पीछे
आजादी से पहले अंग्रेज,आजादी के बाद चरित्रहीन नेता,रूस और अमेरिका की गुप्तचर संस्थाएं और माफिया डॉन, और अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियां, अमेरिका और यूरोप की सरकारें- गुप्तचर संस्थाएं, मुख्य रूप से वो विदेशी बैंक जिनको दिवालिया होने का खतरा है, खनन माफिया,शिक्षा माफिया,चिकित्सा माफिया,शराब माफिया,भू माफिया, बिल्डर माफिया और अन्य भी जिन भ्रष्टों की सरपरस्त कांग्रेस है।
जैसे कि देश के टुकड़े करवाने के लिए कांग्रेस के पीछे माउन्ट बेटन और "लेडी माउन्ट बेटन" कश्मीर समस्या के लिए के लिए भी कोई..... थी। हमारे क्रांतिकारियों को आतंकवादियों कहलवाने के पीछे कौन है ? हमारी संस्कृति-संस्कारों को ढकोसला कहलवाने के पीछे कौन है ? हमारे इतिहास को तोड़ मरोड़कर पढ़वाने के पीछे कौन है ? देश का तीन सौ लाख करोड़ रुपया विदेश में जमा करवाने के पीछे कौन है ? जो बैंक हमारे बेईमानों का पैसा अपने यहाँ छुपाये बैठे हैं; उन्हें भारत के अन्दर अपनी शाखाएं खोलने की अनुमति दिलवाने के पीछे कौन है ? केवल यही एक पार्टी है जो हमारे देश की बर्बादी का कारण है ये बताये इसके पीछे कौन-कौन है ? ......
Wednesday, November 2, 2011
क्रिकेट के नाम पर; बर्बादी कम न थी.............
जिस देश में तीस की रफ़्तार से गाड़ी चलाना मुश्किल हो वहां ३०० की रफ़्तार से रेस लगाने का ट्रेक बन जाये तो कुछ सम्भावना आम जनता के लिए भी बनती है , उनके लिए ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? आखिर आम जनता ने ऐसे नेताओं, अधिकारीयों का क्या बिगाड़ा है ? हे भगवान सद्बुद्धि दो ऐसे नेताओं-अधिकारीयों को जो अस्पतालों में दवाओं,चिकित्सकों,बिस्तरों या सड़ रहे अनाज के लिए गोदाम बनवाने के लिए और स्कूलों में अध्यापकों के लिए धन का आभाव बता कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं जिनकी बनायीं सड़कों से पूरे देश का यदि रफ़्तार का औसत निकाला जाये तो शायद तीस भी न निकले । और भगवान ऐसे नेताओं को सद्बुद्धि देना असंभव हो तो उस जनता को ही दे देना जो इनके ठगने में आसानी से आ जाती है।
क्रिकेट के नाम पर;
बर्बादी कम न थी,
अब फॉर्मुला वन ले आये।
कोई हिसाब लगा कर ये तो बताये;
इन धौनियों सचिनो, या
हीरो-हीरोइनों पर;
पैसे किसने बरसाए ।
धन्य है देश हमारा;
धन्य यहाँ की देश भक्ति,
सीमा पर जवान मर जाये;
हम छक्के पर ताली
बजाएं ॥
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"मानसिक अय्याशों के लिए"
फॉर्मुला वन रेस को देख कर;
ऐसा लग रहा है।
मत याद दिलाओ फांसी झूलते किसानों की,
हस्पतालों में मर रहे बीमारों की,
अनाज को सड़ा रहे गोदामों की,
ये कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।
भारत तरक्की कर रहा है,
फॉर्मुला वन रेस को देख कर;
ऐसा लग रहा है।
क्यों करते हो आलोचना ?
लगता है तुमने समाचार नहीं सुना,
हुआ है भारत का सम्मान दोगुना ,
क्यों ! ये कुछ अच्छा नहीं लग रहा है ?
भारत तरक्की कर रहा है,
फॉर्मुला वन रेस को देख कर;
ऐसा लग रहा है।
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Sunday, October 30, 2011
बुरा न मानना; अगर गधा बन गए तो !
Wednesday, October 26, 2011
खोखली शुभकामनायें
सुख सम्पति मिले आपको अपार,दीपावली की शुभ कामनाएँ करें स्वीकार।
"ये" और इस प्रकार की शुभ कामनाएं अब खोखली सी लगने लगी हैं | चाहे कोई हमें दे या हम किसी को दें, केवल औपचारिकता जैसा ही लगता है | दरअसल आजकल के मीडिया ने हमारे पर्वों-त्योहारों का इतना बाजारीकरण कर दिया है कि उनकी वास्तविकता को ही लोग भूल गए हैं |
पहले हम शुभकामना देते हैं;फिर सावधानी बरतने की नसीहत भी देनी पड़ती है। न जाने कौन सी मिठाई जहरीली या बीमार करने वाली निकल जाये । विदेशी कम्पनियों की चौकलेटों का भी क्या भरोसा ? कैसे-कैसे केमिकल मिले होते हैं।
अजी साहब घर में मिठाई बनाने के लिए भी कौन सा सामान है जो असली मिल जाये ? ऐसे में नसीहतें देने के आलावा क्या कर सकते हैं ? नसीहत भी केवल सावधान रहने की ही दे सकते हैं क्योंकि और तो अपने हाथ में कुछ नहीं है
Sunday, October 23, 2011
क्या पता प्रधान मंत्री भी जेल में हों ?
साथियो बदलाव का दौर चल रहा है, एक दिन में हीरो और कुछ ही घंटों में हीरो से विलेन बन जाने में कुछ भी विशेष प्रयास नहीं करना पड़ रहा। बस केवल जबान चलानी है जैसे अपने भूषण जी ने चलायी, वैसे देखा जाये तो वे अलगाव वादियों के तो हीरो बन गए। अलगाव वादियों का प्रसिद्धि क्षेत्र बड़ा है। उससे इनाम मिलने के चांस ज्यादा हैं और इनाम अंतर्राष्ट्रीय होते हैं इसके लिए अगर अपने देश में विलेन भी बन गए तो क्या ? वैसे बड़ा दुर्भाग्य है ! कोई अपने-आप विलेन बन रहा है किसी को सरकार विलेन बनाना चाह रही है, एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। पर ये तो उस बदलाव पर निर्भर है किसे क्या बनाना है। अलबत्ता सरकार अपने भोपू (न्यूज़ चेनल्स) के माध्यम से प्रयासरत है ।
बदलाव करने में सरकार कसर नहीं छोड़ रही। ३-३,४-४ मंत्री जिसकी अगवानी करने पहुंचें; सोचो ! कितना मान दिया होगा ? फिर उसी के विरुद्ध रामलीला मैदान में आधी रात को लठ चलवा दिए। ये भी बदलाव का ही हिस्सा है जो कल तक मंत्री थे वो अब जेल में हैं। क्या पता बदलाव थोड़ा और बढे तो प्रधान मंत्री भी जेल में हों। क्योंकि पूरे विश्व में इस समय बुराई के विरुद्ध एक आक्रोस तो पनप ही रहा है । सबसे बड़ी बात ये है कि "बुरों" का कोई वश नहीं चल रहा इन लड़ने वालों के विरुद्ध।
पूरे विश्व में एक बदलाव का दौर चल रहा है। मौसम अपने सुहाने पूर्ववर्ती दौर में करवट बदल रहा है, बड़े-बड़े तानाशाह धराशायी हो रहे हैं। कभी चालीस-चालीस साल तानाशाही करी वे तक कुत्ते की मौत मारे जा रहे हैं। पीढियॉ की पीढियॉ ख़त्म हो रही हैं।
एक बड़ा अंतर है दुनिया के तानाशाहों में;और भारत के तानाशाहों में, उन्होंने ताकत के दम पर अत्याचार करके अपनी तानाशाही कायम रखी, इन्होने एक शातिर ठग की तरह अपने देश वासियों पर तानाशाही कायम रखी। मौतें वहां बेशक प्रत्यक्ष हुयी पर मौतें यहाँ भी कम नहीं हुयी चाहे भोपाल गैस कांड हो या हमेशा बाढ़ से मरने वाले हों, या कोई अन्य कारण हों मरने के, सब पर इन्होने अपनी चालाकी और ठग बुद्धि से जनता को भ्रमित किया है। और जिस तरह से लूट मचाई है वह किसी तानाशाह से कम नहीं है।
हमारे यहाँ तो इस तरह भगवान कृष्ण ने कंस को मारा था उसके बाद तो किसी की इस तरह की मौत हमने सुनी नहीं । हाँ; सिनेमा में जरुर देखने को मिल जाती है।