एक आदमी मर कर गधा बन गया; उसे बड़ा बुरा लगा। वो भगवन जी के पास गया और शिकायत करी। भगवान जी ने समझाया; ‘जब तुम्हें सोचने-समझने, कुछ करने और बोलने की शक्ति दे कर; मनुष्य बना कर धरती पर भेजा था तो तुमने इनमे से कुछ नहीं किया; बस अपने में मस्त रहे। प्रकृति-पर्यावरण,समाज-संस्कृति, देश-धर्म के लिए कुछ नहीं कर सके जिससे धरती पर सबके लिए बोझ बन गए थे अब उस ऋण को बोझा ढो कर ही चुकाया जा सकता है; इसलिए तुम्हें गधा बनाया है; अब सबका बोझा ढोओ'।