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Saturday, November 14, 2015

पञ्च मक्कार !!! ये तो अभी ट्रेलर देखा है देश ने !


दूध देने वाली #गाय की लात भी सहनी पड़ती है ये सरकार देश के लिए सही है तो इनकी गलतियाँ भी सहेंगे ... जो लोग किसी भी पार्टी के सदस्य हैं या पदाधिकारी हैं उनकी निष्ठा बदल सकती है ! उन्हें देश धर्म समाज संस्कृति सभ्यता से कुछ नहीं लेना होता, उनको ये पार्टी उनके अनुकूल नहीं देती तो वो दूसरी पार्टी में जा घुसते हैं ! और कल तक जिसको सर्वेसर्वा माना था उसे ही गरियाने लगते हैं ! लेकिन हमारे जैसे लोग देश के लिए अच्छे की सोचते हैं और इसलिए जो देश के लिए अच्छा लगे उसे समर्थन करते हैं हमारा कांग्रेस के किसी भी व्यक्ति से कोई व्यक्तिगत विरोध या झगडा नहीं है हमारा कंग्रेसिज्म से विरोध है | कई कांग्रेसी अपनी पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टी में गए हैं मैं उन्हें भी पसंद नहीं करता क्योंकि वो केवल स्वार्थी हैं और कुछ नहीं | और कांग्रेस ....... कांग्रेस के विषय में पहले भी कई बार लिख चूका हूँ .... ये पञ्च मक्कारों से ग्रस्त विचार वाली पार्टी है इसका समर्थन हम नहीं कर सकते |इसीलिए चाहे परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज हों या भाई राजीव दीक्षित जी हों हमें देश के लिए कुछ करने वाले लगे तो हम जी जान से इस आन्दोलन के साथ हो लिए | वो तो ये आन्दोलन अन्ना केजरी & कम्पनी ने (उन्हीं पञ्च मक्कारों के षड्यंत्र से; जिनका खुलासा मैं समय समय पर करता रहता हूँ इस समय भी नीचे किया है) भरमाने का प्रयास किया ! लेकिन पूर्ण सफल नहीं हुए |  स्वामीजी का नेतृत्व इसे संभाल ले गया वर्ना देश में दिल्ली वाला खेल चल रहा होता | स्वामी जी को मोदी जैसा नेता मिला आपस में बात हुयी होगी ..... जो बाद में सही भी सिद्ध हुआ है .... एकदम से बदलाव हो नहीं सकता बदलाव धीरे धीरे ही होगा |    
खैर ......
बिहार की हार तो कुछ भी नहीं भाईसाहब .....
ये तो अभी ट्रेलर देखा है देश ने ! ये असहिष्णुता ! ये दादरी ! ये सुनपेड ! ये बीफ ! ये सम्मान वापसी ! ये महंगाई ! ये साईं बाबा ! ये पूर्व सैनिकों का OROP आंदोलन और अब ये टीपू सुल्तान आदि आदि जाने क्या क्या बिना सर पैर के मामले हैं जो छत्तीस सालों से देश में व्याप्त हैं लेकिन आज तक नहीं भड़के क्यों ? 
शर्त लगा लो !
ये मोदी सरकार को पांच साल नहीं चलने देंगे !
देख लेना अगर... अगर ये केंद्र सरकार पूरे पांच साल चल जाये तो !
चल भी गयी तो ऐसे ही लंगडाते लड़खड़ाते हुए चलेगी आम जनता के मन मष्तिष्क पर कोई प्रभाव नहीं डाल पायेगी और दोबारा चुनाव लड़ने में मोदी जी को भी डर लगेगा, जीतना मुश्किल हो जायेगा जैसे अटल सरकार के बाद हुआ था | इनके अपने ही इनको हराने वाले हो जायेंगे |
इस देश को वास्तव में अगर कोई चला सकता है तो केवल #कांग्रेस !
कांग्रेस और कांग्रेस |
क्यों ?
क्योंकि इस देश में अभी स्वाभिमानी राष्ट्रवादियों की संख्या पञ्च मक्कारों  से प्रभावित लोगों से कम है और देश में पांच मक्कार भरे पड़े हैं कांग्रेस इनकी पोषक है बल्कि उसने इनके साथ छठा (M) मुसलमान को जोड़ कर इस शक्ति को इतना बढ़ा लिया कि कभी भी कहीं भी स्थिरता नहीं होने देने की शक्ति उसके पास हो गयी है ;
जब मर्जी तब दंगे करवा सकते हैं !
जब मर्जी तब किसी भी वस्तु की कालाबाजारी करवा सकते हैं !
जब मर्जी तब राष्ट्रवादियों को बदनाम कर सकते हैं राष्ट्रवाद की खिल्ली उड़ा सकते हैं |
ये "पंच मक्कार" नीचे स्लाइड में लिखे हैं !
अच्छा सोचो !
ये टीपू सुल्तान की जयंती वाला मामला क्या इससे पहले भी कभी हुआ था ?
मेरा मतलब क्या टीपू सुल्तान की जयंती कभी पहले भी मनाई गयी थी ?
नहीं ?
तो फिर अब क्यों ! इसी बार क्यों !
ये सवाल उनसे 
कोई नहीं पूछ रहा ! उलटे #राष्ट्रवादी लोगों से सवाल पूछे जा रहे हैं कि विरोध क्यों !
उकसाया जा रहा है; #गौडसे की जयंती मनाने को !  फिर उस पर बवाल काटेंगे !
खैर हम तो समझ रहे हैं ,
लेकिन आम जनता भ्रमित हो जाती है और वही कहती है जो मैंने ऊपर कहा ! कि ;
इस देश को केवल कांग्रेस ही संभा सकती है |
बिहार हार के बाद भजपा के अन्दर के विरोधी और कुछ बड़े नेताओं की भावनाओं को भड़काने के काम में भी यही पञ्च मक्कार अपने हाथ पैर घुसेड़े हुए हैं; कही दो फाड़ करवा दें !

Sunday, October 18, 2015

कैसे इस कांग्रेस ने सही लोगों को बेबात ही बदनाम करके अपना उल्लू सीधा किया ! ऐसा ही ये क्रांतिकारियों के साथ भी करते थे नेताजी सुभाष हों या बिस्मिल अजाद हों या भगत सिंह इन सबसे ज्यादा अन्याय वीर सावरकर के साथ हुआ है ...

कांग्रेस केवल पार्टी नहीं है बल्कि एक मानसिकता या संस्कार बन गयी है और इस मानसिकता के लोग जहाँ पर होंगे वहीँ से वार करेंगे |
हम विरोध करते हैं किसी छोटे मोटे नेता या कार्यकर्त्ता का जबकि मैं विरोध करता हूँ इस की विचार धारा का ! वो कार्यकर्त्ता कल को पार्टी बदल कर अपनी निष्ठां बदल लेता है लेकिन उसे शर्म नहीं महसूस होती क्योंकि वो तो गलत से
सही की ओर गमन कर रहा है |

नीचे एक अख़बार में छपा सम्पादकीय दिया है कैसे इस कांग्रेस ने सही लोगों को बेबात ही बदनाम करके अपना उल्लू सीधा किया ! ऐसा ही ये क्रांतिकारियों के साथ भी करते थे नेताजी सुभाष हों या बिस्मिल अजाद हों या भगत सिंह इन सबसे ज्यादा अन्याय वीर सावरकर के साथ हुआ है | और जब एक ईमानदार संस्कारवान व्यक्ति इस सब्ब्को सहन नहीं कर पाता तो गौडसे बन जाता है यही ये चाहते हैं ताकि इनका कोई चरित्रहीन नेता महात्मा बन जाये और ये उसकी हत्या की आड़ में अपने विरोधियों को बदनाम कर सकें और अपने कुकृत्यों को छुपा सकें जैसे पकिस्तान बनवाने की घटना |

ये तो ये समझ लो इस समय भी देश में भारतीयता (देशभक्ति) का इतना उबाल है कि इनकी एक न चल पायी और न चल पा रही है ! एक तो पिछले दस वर्षों में बाबा रामदेव जी ने लोगों में संस्कार जगा दिए हैं भाई राजीव दीक्षित जी ने इतिहास और देशभक्ति का ऐसा पाठ  पढ़ा रखा है वर्ना ऐसी ही स्थितियों में ये इमरजेंसी लगाने से नहीं हिचके थे |

इस कांग्रेस के पास इतने हथकंडे हैं .... किसी को भी बदनाम करने और केवल क़ानूनी जाल में उलझाने के लिए ही नहीं अपितु अन्य भी  ...... हम आप तो सोच भी नहीं सकते |
इनके गुर्गे लगभग हर जगह फिट हैं कोई ऐसा स्थान नहीं जहाँ इनके द्वारा उपकृत भारतीयता विरोधी तत्व न हों | जैसे कि

1 . लोग परेशान हैं दाल , प्याज व कुछ एकाध सामान की महंगाई के लिए ! लेकिन अगर ये महंगाई वास्तविक होती तो सभी चीजें महंगी होती मसलन चीनी तो साठ सत्तर रूपये किलो बिक रही होती !
लेकिन ये महंगाई बनावटी है ...... व्यापारिक क्षेत्र में व्याप्त कंग्रेसिज्म से प्रभावित और कांग्रेस से उपकृत लोग अपना कर्तव्य कांग्रस के प्रति निभा रहे हैं |
2. देश में दंगे या आपसी झगड़े के नाम पर जो बवाल मच रहा है उसके पीछे भी ऐसे ही इनके स्लीपर सेल सरकार को बदनाम करने के लिए सीधे सादे लोगों को उकसाने का काम कर रहे और अपने आप साफ़ बच जाते हैं |
3. इनके बौद्धिक वर्ग में व्याप्त स्लीपर सेल साहित्यकार अपने पुरस्कार वापस लौटा कर अपना फर्ज इनके प्रति पूरा कर रहे हैं |
4. सरकार की बड़ी बड़ी संस्थाओं में, अभी एक में ही नजर आया है; सुप्रीम कोर्ट में,  मोदी सरकार के किसी भी फैसले के विरुद्ध लोगों में भ्रम फ़ैलाने का हथकंडा चलेगा |
5. कला क्षेत्र में भी इस मानसिकता के कलाकार अपना दायित्व निबाहेंगे जैसे FTII में चल रहा है |
6. सरकारी नौकरियों में हर जगह पर इसी मानसिकता के व्यक्तियों पिछले सत्तर साओं में जमावड़ा हो रखा है वो इसे कामयाब नहीं होने देंगे इसका छोटा सा उदहारण ले लो क्या आपके आसपास के सरकारी कार्यालयों में सफाई रहने लगी ........... उलटे सफाई के के नाम पर ये उपहास के रूप में लेते हैं |
कोई भी शै छूटी  नहीं है इस मानसिकता से जो इस सरकार को सफल होने दे

Thursday, October 1, 2015

हमारे देश के बड़े शहरों ने देश को बीमार किया हुआ है ! क्योंकि शक्ति एक जगह केन्द्रित हो गयी है जैसे मानव शारीर में गठिया वात हो जाता |

दिल्ली में एक केजरीवाल क्या दस केजरीवाल आ जाएँ वो भी यही करेंगे जो ये कर रहा है !
दरअसल जैसे मानव शारीर में किसी एक जगह पर शक्ति या कुछ तत्वों का एकत्रीकरण हो जाये तो वह बीमारी बन जाता है !
वैसे ही हमारे देश के बड़े शहर देश के लिए बीमारी बने हुए हैं ! यहाँ शक्तियों का एकत्रीकरण हो गया है | जिससे वहां चरों ओर से जनसँख्या का आक्रमण हो रहा है और सुविधाएँ कम पड़ती जा रहीं हैं | लोगों को मज़बूरी के कारण इन शहरों में आना पड़ रहा है कोई शिक्षा के लिए , कोई इलाज के लिए , कोई रोजगार के लिए, ये सब मज़बूरी के मारे हैं फिर यहीं बस जाना चाहते हैं |
पिछले सत्तर सालों से लोकतंत्र के नाम पर सत्ता का विकेंद्रीकरण किया गया है जबकि विकास का विकेंद्रीकरण होना चाहिए था |
अकेले दिल्ली में सैकड़ों बड़े बड़े कॉलेज ! सैकड़ों बड़े बड़े अस्पताल ! बड़े बड़े अन्य तकनिकी संस्थान ! कार्यलय आदि सब एक ही स्थान पर कर दिए गए |
क्यों ??????????
आज कहा जायेगा वहां की जरुरत है इसलिए !
लेकिन ;
जरुरत पड़ी क्यों ! दिल्ली में भीड़ बढ़ी क्यों ?
अगर प्रत्येक राज्य में दस बीस कॉलेज (दिल्ली जैसे ) बीस तीस अस्पताल, अन्य शिक्षण संस्थान व कार्यालय होते तो इतनी भीड़ दिल्ली में क्यों इकट्ठा होती | छोटे छोटे रोजगार भी वहीँ पनपते |
जैसे हर राज्य में एक उच्च न्यायलय है और जिला न्यायलय है फिर तहसील स्तर पर भी है वैसे ही ये सभी सुविधाएँ होती तो गांवों से पलायन भी रुकता और एक जगह शक्ति का केन्द्रीकरण नहीं होता और हमारे शहर सुन्दर होंते ;
अभी तो बीमारी हैं |
दिल्ली की तर्ज पर प्रत्येक राज्य का विकास होना चाहिए वर्ना ये शहर एक दिन समस्या बन जायेंगे | 

Wednesday, May 27, 2015

अगर मोदी कह दे कि आप को गर्व होना चाहिए आप अपने पिता की संस्कार वान संतान हो तो भी वो विरोध में चिल्लाने लगेंगे मोदी ने ऐसा क्यों कहा !

हम भारतीय लोगों में अधिकांस बहुत भुलक्कड़ प्रकृति के होते हैं !
इसीलिए अंग्रेज या "एंग्लो कांग्रेस" हम पर लम्बे समय तक राज कर गए (अभी भी कर रहे हैं ) !
अब देखो न एक साल पहले तक की परिस्थितियों को हम भूल रहे हैं .... कितना आजिज आ गए थे हम कांग्रेस से !
इसी भूल में हम अभी एक साल में ही उस व्यक्ति को जिसे पिछले पंद्रह साल तक तो देखा भाला है कोई बुराई उसके द्वारा नहीं हुयी है; इतनी बुरी बुरी बातें कहने लगे लगे हैं कि शायद कोई नीच से नीच भी नहीं कहता होगा |
अंजे गंजे प्रकार के लोग जिनके बालों के साथ साथ दिमाग भी उड़नछू हो गया है वो तो जैसे किसी नाजायज (कांगी की औलाद) आवारा लफंगे की तरह बौखला बौखला कर अनाप शनाप भौंके जा रहे हैं ! लगता है जैसे पुराने ज़माने में दुश्मन की सेना में भगदड़ मचाने को अपने लोगों को भरती करवा देते थे वैसे ही कांग्रेस ने भी इन्हें शुद्ध भारतीयों के बीच में घुसा दिया है ..... शायद !
ये अपने  को देशभक्त लिखेंगे (फोटो नहीं लगायेंगे), ये अपने को स्वामी रामदेव या भाई राजीव भक्त लिखेंगे; उनकी फोटो लगायेंगे ! लेकिन विचार (संस्कार) देख कर पता लग जायेगा कि कौन हो सकते हैं,  बाकि कान्गियों से तो हमें कोई शिकवा नहीं वो तो विरोध करें तो अच्छा ही है |
ये विदेशी निवेश को मुद्दा बना रहे हैं ... क्योंकि कांग्रेस ने दुष्प्रचार कर दिया है कि भाजपा पहले विदेशी निवेश का विरोध करती थी अब स्वयं करवा रही है लेकिन क्योंकि इनके पास बुद्दी का आभाव है ये सोच तो सकते नहीं विचार करना तो दूर की बात ! पहले विदेशी निवेश केवल सामान यहाँ बेचने के लिए होता था अब जो भी निवेश होगा वो तकनिकी भी साथ लाने और कारखाने यहाँ लगाने के लिए होगा ! जिसे मेक इन इण्डिया कहा गया |
और भी अन्य विभिन्न मुदों पर चाहे हिंदुत्व पर बवाल का हो या धारा 370 का, गौहत्या का हो या राम मंदिर का, सब के सब ऐसे दुष्प्रचार के जाल में उलझे हैं जो भारतीयता विरोधी समाचार जगत बौद्धिक और राजनैतिक विरोधियों ने बना दिया है !
और हर बार यही होता है ....
कुछ भारतियों की मुर्खता के कारण सही परिस्तिथियों को न समझ पाने के कारण भारत हार जाता है और इण्डिया जीत जाता है | 
कोई भी व्यक्ति सही या गलत जैसा भी करे उसके लिए वो सरकार में होगा तभी कुछ कर पायेगा ! बाहर रह कर वो घंटी भी नहीं हिला सकता, उसके लिए वोट चाहिए.... वोटों के लिए कुछ निर्णय समयानुसार वोटरों को खुश करने के लिए करने पड़ते हैं वर्ना ये भ्रम फ़ैलाने वाले  (भारतीयता विरोधी समाचार जगत बौद्धिक और राजनैतिक विरोधि)जो गिद्धों की तरह नजर गडाए बैठे हैं !
अपने आकाओं के इशारे पर कब कि कोई ऐसा काम हो जिससे मोदी सरकार को इतना बदनाम किया जाये कि इन्हें बीच में ही भागना पड़े या अगली बार तो कमसेकम ये दोबारा न आयें | इन्हें अभी तक कोई मुद्दा ऐसा मिला नहीं है फिर भी इन्होने कोहराम मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी !
सोचो अगर कोई ऐसा काम कर दिया ! जैसे नेहरु या गाँधी की वास्तविकता प्रधान मंत्री सामने रख दे, या उनका नाम न ले तो पूरा विश्व तो उन्हें भारत के तारनहार के रूप में देखता है होगा या नहीं bharat का नुकसान ?
और हमारे तथाकथित अपने को देशभक्त या स्वाभिमानी कहने वाले लोग उनकी ही सहयता कर रहे हैं ! वो लोकतान्त्रिक प्रणाली को नहीं समझ रहे हैं !
वो इस लोकतान्त्रिक प्रणाली में पद बने रहने के लिए किये जाने वाली तिकड़मों को नहीं समझते !
कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर बहुत लम्बी चर्चा की जा सकती है !
लेकिन जिन्हें विरोध करना होता है वो कुछ भी कर लो विरोध ही करेंगे उनके लिए तो अगर मोदी कह दे कि आप को गर्व होना चाहिए आप अपने पिता की संस्कार वान संतान हो तो भी वो विरोध में चिल्लाने लगेंगे मोदी ने ऐसा क्यों कहा ! तर्क देने लगेंगे कि क्या मोदी के कहने से कोई संस्कारवान कहलायेगा ! है न आश्चर्य |  

Monday, March 16, 2015

देखें अब कब तक लोग अपनी आँखों से टोपियां पीछे सरकाते हैं।


टोपियों का बाजार फिर से गर्म हो गया !  
घूम घूम कर दोबारा दोबारा जा रहा है !
मौसम एकदम से करवट लेता है और टोपियों के साथ मफलर आदि गर्म कपड़े जो संभाल दिए थे फिर से निकालने पड़ते हैं !
परेशान हो गए मौसम के इस अजीबोगरीब "मिजाज" से; कई बार टोपी उतार चढ़ा दी !
सर्दियों में तो चलो कोई बात नहीं गर्मियों में क्या होगा ?
वैसे ही लगातार टोपी पहनने से सर के बाल तो उड़ते ही हैं बुद्धि भी ताजा हवा मिलने से कुंठित सी हो जाती है।
और अगर टोपी कहीं थोड़ा सा आगे को सरक गयी तो ! आँखें बंद ; दुर्घटना का खतरा, भगवान बचाये टोपी से !
अब तो गर्मियों का मौसम रहा है !
अगर टोपी पहनी तो खोपड़ी गर्म पहनें तो कब मौसम बदल जाये कोई पता नहीं !
एक बात है अगर टोपी ऐसी हो जिस पर कोई चोट असर करे (हैलमेट जैसी) तो  उसके फायदे भी बहुत हैं !
प्रदर्शन आदि में लाठी चलने पर अपना सर बचता है ! और विरोध में सर से निकालो दूसरे पर दनादन पिल जाओ !
लेकिन ऐसी टोपी (कागज की) किसी काम की नहीं; जिसे जब मन करा मोड़ा माड़ा जेब में रख लिया जब मन करा पहन लिया।
तो दोस्तो ! टोपी पहनने की आदत मत पाल लेना और पाल ली तो आँखों पर मत सरकने देना और कमसेकम सोते समय तो उतार देना जिससे दिमाग को कुछ ताजा हवा लगे तो सोचना समझना कर सके।
और हाँ दूसरों को टोपी पहनाना भी गलत होता है !
1947 (वैसे 1885 में) में विदेशियों ने देशवासियों को टोपी पहना दी थी ! वो लोगों के आँखों तक सरक गयी ! जिससे बुद्धि और आँखें दोनों बंद !  बड़ी मुश्किल से सत्तर साल बाद खुलने लगीं थी कि फिर टोपियों का मौसम ........
देखें अब कब तक लोग अपनी आँखों से टोपियां पीछे सरकाते हैं।

Saturday, February 14, 2015

आखिर वो मानसिकता कौन सी है ? जो 1857 के देश भक्त सैनकों के विद्रोह को प्रथम स्वाधीनता संग्राम नहीं मानते थे ! ठीक वैसा ही घटना क्रम अब भी चल रहा है; उसी साजिश के तहत ! भ्रष्टाचार के विरुद्ध पहला आंदोलन 27 फरवरी 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में ही हुआ था लेकिन उसे भुलाया जा रहा है।

क्या हम जानते हैं वो मानसिकता कौनसी है ? 
जबकि उससे भी पहले मुगलों अंग्रेजों पुर्तगालियों के विरुद्ध आंदोलन (युद्ध) हुये थे !
इनमे देशभक्त हिन्दू मुसलमान सभी शामिल रहते थे लेकिन उनका कहीं नामोनिशान नहीं !
ऐसे देशभक्तों को देश की जनता से छुपाने वाली 
वो मानसिकता कौन सी है क्या हम जानते हैं ?
1857 के बाद भी न जाने कितने क्रन्तिकारी देशभक्तों को अंग्रेजों ने तोपों गोलियों से उडाया होगा !
1885 में कांग्रेस गठन के बाद भी कांग्रेस के ही कई देशभक्त कार्यकर्त्ता और नेता (लाला लाजपतराय जैसे)शहीद हुए होंगे 
कांग्रेस के आलावा तो हजारों देशभक्त क्रांतिकारी शहीद हुए ! उनका नाम लेने में भी संकोच करने वाली 
वो मानसिकता कौन सी है ये भी नहीं जानते होंगे ! 
वो मानसिकता ! वो शक्ति ! कौन सी है ? 
जिसने मैकॉले को यहाँ की शिक्षा व्यवस्था बदलने को बोला !
जिसने मैक्समुलर को वेदों का अंग्रेजी अनुवाद अपने मन मुताबिक ऊटपटांग तरीके से करने को बोला !
जिसने भारत को गड़रियों सांप सपेरों जादू टोने और जादूगरों का देश बताया !    
इस मानसिकता या शक्ति ने दुनिया के सबसे कमजोर व्यक्ति को अपने स्वार्थ के लिए देश के साथ साथ दुनिया में भी अहिंसा का मसीहा बना दिया और उसकी आड़ में एक ऐसे व्यक्ति को इस देश का प्रथम प्रधान मंत्री बना दिया जिसे देश नहीं चाहता था । 

ठीक वैसा ही घटना क्रम अब भी चल रहा है; उसी साजिश के तहत ! 
ये मैं, कम से कम मैं तो जनता हूँ कि ये वही शक्ति वही मानसिकता है ! जो इस देश में "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" का उदय नहीं होने देना चाहती। 






एक एक कर तथ्य दे रहा हूँ !
भ्रष्टाचार के विरुद्ध पहला आंदोलन 27 फरवरी 2011 को दिल्ली के रामलीला मैदान में ही हुआ था लेकिन उसे भुलाया जा रहा है। 
उससे पहले पूरे देश में 650 जिलों के तहसील और हर गांव में भ्रष्टाचार के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान चला था उससे प्राप्त करोड़ों पपत्र राष्ट्रपति को सौपने के लिए रामलीला मैदान पहुंचाए गए थे  ! इसमें भी देश की बड़ी बड़ी हस्तियां शामिल हुईं थी , रामजेठमलानी ने तो सोनिया पर सीधे आरोप लग दिए थे। https://www.youtube.com/watch?v=wjWaZHMyngc 27-2-2011 ramlila maidan
सुबूत भी दे रहा हूँ। 
ये आंदोलन इतना व्यापक था कि देश के सभी जिला व तहसील मुख्यालयों पर आयोजित हुआ था। हमने भी अपने यहाँ किया था। 
इसी आंदोलन के दूसरे चरण में 23 मार्च 11 को शहीद दिवस के दिन फिर से सभी जिला मुख्यालयों पर ऐसा ही विरोध प्रदर्शन हुआ था; उसे भी भुलाया जा रहा है।  

 भ्रष्टाचार के विरुद्ध पहला आंदोलन स्वामी रामदेव जी का था न कि अन्ना का ! साजिश के तहत उसे भुलाया जा रहा है !
प. पू. स्वामी रामदेव जी महाराज को मैं पिछले दस साल से फॉलो कर रहा हूँ और भ्रष्टाचार के विरुद्ध जितना मुखर मैंने स्वामी रामदेव जी को देखा है 2004 से ही; उतना इस देश में कोई नहीं देखा। 
हाँ एक पार्टी पर टारगेट भारत स्वाभिमान संगठन बनने (जनवरी 2009) के बाद हुआ जब उस पार्टी ने स्वामी जी के कामों में अड़ंगा लगाना शुरू  किया। 


Tuesday, May 27, 2014

एक विषय पर विचार, चर्चा और तर्क करना चाहिए कि बेरोजगारी के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं ! मेरा अपना मानना है कि बेरोजगारी के लिए केवल "नौकरों वाली मानसिकता" जिम्मेदार है।

इस स्वतंत्र प्रवृत्ति के भारत देश में निवास करने वालों की मानसिकता अंग्रेजों ने नौकरों वाली बना दी है।
इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकारी और सार्वजानिक क्षेत्रों में नौकरों को विशेष सुविधायें , तनख्वाह , पेंशन दोबारा नौकरी, बच्चों को नौकरी और इस सबके बावजूद हड़ताल करने के अधिकार जैसे प्रलोभन दिए गए; इन सबसे बड़ा जो लालच है वो कोई काम न करके भी आराम से तनख्वाह मिल जाना और किसी भी बात के लिए कोई दंड निर्धारित न होना; जो आज सरकार के गले की फ़ांस बन गए हैं और पढ़े लिखे लोग इन्हीं सुविधाओं के लालच में बैठे हैं बेरोजगारों के रूप में। अब तो भ्रष्टाचरण के द्वारा अथाह धन की लालसा सबसे बड़ा कारण बन गया है।
आर्थिक दृष्टि से काम का विभाजन कर दिया गया छोटा काम ! बड़ा काम ! अगर अपना काम करने वाले मामूली लोहार की आय भी कंप्यूटर इंजिनियर के बराबर हो या एक किसान की आय भी किसी क्रिकेट खिलाडी या सरकारी अधिकारी के सामान हो या छोटी सी दुकान चलाने वाले को सरकार की तरफ से नौकरी वाली सुविधाएँ और आय मिलें तो सारी बेरोजगारी ख़त्म हो सकती है।  गांवों से पलायन रुक सकता है।  शहरों का बोझ और गंदगी काम हो सकती है।
बेरोजगारी

Thursday, May 22, 2014

इसे कहते हैं यतो धर्मस्ततो जयः !
सच में !!!! सारे कलमुहों का काला मुहं दिखना बंद हो गया। 
'बाबा राम देव 
ठग हैं ! 
व्यापारी हैं ! 
ढोंगी हैं' ! 
कहने वाले ;
अब अपने गले में पत्थर बांध कर किसी गंदे नाले में डूबने तो नहीं चले गए ? 
परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज और भारत स्वाभिमान आंदोलन एक बार फिर अपने लक्ष्य में सफल हो कर 
आज फिर से अथाह लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गए हैं। 
और इनको बुरा भला कहने वालों को मुहं दिखाना भी मुश्किल पड़ रहा है। 

Wednesday, May 14, 2014

विकास के नाम पर चुनाव का ढिंडोरा एक साजिश के तहत पीटा गया है वर्ना इस बार का चुनाव तथाकथित देशभक्ति (सेकुलरिज्म) और वास्तविक राष्ट्रवाद का देवासुर संग्राम था इसीलिए इसे "धर्म युद्ध 2014" नाम दिया गया।

लोग हार जीत को पार्टियों की नजर से देख रहे हैं ! मतलब ऊपरी तौर पर देख रहे हैं !
 अगर वास्तव मे सही विश्लेषण किया जाएं तो ……  
तो ये हार है !
तथाकथित सेकुलरिज्म की।   
ये हार है ! खोखले विकासवाद वाद की ; जिसमे आंकड़ों का खेल ही सरकार की कामयाबी मान लिया जाता है। 
ये हार है ! खोखली देशभक्ति की ; जो सिनेमा हॉल से बाहर निकल कर भुला दी जाती  है। 
ये हार है ! भ्रष्टाचार को सदाचार मानने वालोँ की। 
ये हार है ! उन विदेशी कम्पनियों, विदेशी सरकारोँ, विदेशी सस्थाओं की जो भारत मे अपनी संस्कृति को बढ़ावा दे रहीं हैं।  

विकास के नाम पर चुनाव का ढिंडोरा एक साजिश के तहत पीटा 

गया है वर्ना इस बार का चुनाव तथाकथित देशभक्ति (सेकुलरिज्म) 

और वास्तविक राष्ट्रवाद का देवासुर संग्राम था इसीलिए इसे "धर्म 

युद्ध 2014"  नाम दिया गया।   

इस चुनाव में बहुत कुछ विशेष हुआ है ! उसका कारण मानो या ना मानो  ! भारत स्वभिमान आन्दोलन और परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज का  अथक परिश्रम रहा है। उनके ही प्रयासों से मोदी जी जैसा तैयार नेतृत्व सर्व मान्यता, सर्व व्यापकता पाकर चन्द्रगुप्त की भूमिका निभाने को पूरे पराक्रम से 300 से ज्यादा सीटें जीत कर भारत को पूनः विश्व गुरु बनाने का गौरव प्राप्त करेंगे। 
प पू. स्वामीजी ये कह कर  अपने सभी अनुयायीयों को समझाते रहे हैं कि जैसा नेतृत्व देश को वर्तमान मे चाहिए उसे तैयार करने मे पचास साल लग जाएँगे जो क्षमता , जो गुण , जो दृढ़ता , जो निर्भीकता इतनी बड़े देश के प्रधान मन्त्री मे होने चाहिए वो सब अधिकांस नरेन्द्र मोदी मे हैँ। इसीलिए नरेंद्र मोदी को देव इच्छा मान कर सभी स्वाभिमानी भाई - बहन स्वामी जी आदेश को पूरा करने मे लग गये।  
   अब इन्तजार है फैसले की घड़ी का; इस उम्मीद के साथ कि कांग्रेस अपने सफाये की ओर है, और ये श्राप उसको चार जून २०११ को राम लीला मैदान में मिला था जब उसने वहाँ बर्बरता का नंगा नाच नाचा था।     
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