उन्होंने पीड़ित जन की आवाज को जितनी सहज भाषा में गाने के लिए बनाया उतना ही सहज जीवन भी जिया।उनके तेवर हर प्रकार की बुराई के विरोध में रहे चाहे सामाजिक बुराई हो राजनीतिक हो या सरकारी, इसीलिए
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Tuesday, August 24, 2010
"गिर्दा का जाना" श्रद्धांजलि “ पुनर्जन्म फिर इसी पहाड़ में हो”
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