कोई तो होती ……
जो, पलट के कहती,
कि; हमें आरक्षण क्यों ?
हम पुरुषों से कम नहीं ,
पुरुष हमसे हैं,
तो, बिना पुरुषों के हम नहीं,
हम अशक्त नहीं, सशक्त हैं;
पुरुषों की धमनियों में,
बह रहा है जो, वो रक्त हैं ,
आरक्षण देकर हमें अशक्त ना बनाओ,
बल्कि राजनीति में जो; अपराधी,भ्रष्ट
और छिछोरे हैं; उन्हें भगाओ ,
स्वस्थ-संस्कारित समाज और राजनीति बनाओ,
अगर तुमसे ना बन पाए तो; "ओ कायरो"
हम बनायेंगी , तुम घर बैठ जाओ ।