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Saturday, March 12, 2016

तन मन धन और अन्न की ऐसी बर्बादी ........ वो भी शुभ कार्य में ! राम राम

             पिछले दिनों अपनी भांजी के विवाह के अवसर पर दिल्ली में काफी नजदीक से सारी व्यवस्था देखने का अवसर मिला , तो जो नजर आया उसने सोचने विचारने पर मजबूर कर दिया ! लगभग दो सौ किलो से ज्यादा सब्जियों फलों के छिलके के नाम पर खाने योग्य हिस्से (चित्र में गोल घेरे में) और लगभग दो सौ लोगों का पेट भरने लायक तैयार खाद्य सामग्री, लगभग सौ से ज्यादा खाली कोल्ड ड्रिंक की बोतलें और.... और भी बहुत कुछ सब कचरे में गया ! (कचरे के बोझ से दिल्ली दबी जा रही है ) ये एक विवाह में हुआ !
           मतलब ! दो परिवारों से लड़का लड़की के विवाह द्वारा एक घर बसा यही सही होता है बाकी तो सब कुछ ..... सबकुछ मतलब तन मन धन और अन्न का नुकसान ही होता है । बड़े बूढ़े कहते थे अन्न का अपमान करोगे तो भूखे मरोगे........ वही हो रहा है; लेकिन इस विचार को दकियानूसी कह कर हंसी में उड़ा देने वाली मानसिकता वाले लोगों द्वारा ऐसे संस्कार जो हमारी शिक्षा में होने चाहिए थे निकाल दिए जिससे आज ये सब हो रहा है।

            हलवाई जिस प्रकार से सब्जियां व सलाद बनाता है अगर थोड़ा सा ठीक से प्रयोग करे तो शायद आधे सामान में ही काम हो जाए ---- फूल गोभी पालक मूली गाजर शिमला मिर्च आलू आदि सब्जियां आधी तो छीलने के नाम पर फैंक दी जाती हैं। हलवाई का व्यव्हार (साग सब्जियों के साथ )  देख कर ऐसा लगता है जैसे ये कार्यक्रम करवाने वालों से दुश्मनी है। भोज के नाम पर व्यंजन भी इतने अधिक हो जाते हैं कि मेहमान क्या खाएं क्या न खाएं छप्पन भोग तो अपने शास्त्रों में सुना था पर आजकल तो शायद अस्सी या सौ व्यंजन हो जाते होंगे ऐसे समरोहों में।
तारीफ की बात ये है कि सब्जियां और नाश्ते, फल और जूस आदि जितने खपते हैं उतने ही या उससे थोड़ा बहुत कम ज्यादा बने हुए बर्बाद होते हैं...... जो बच जाते हैं ।
ये केवल धन की ही हानि नहीं है अपितु अन्न की भी हानि है इसके कारण भी महंगाई और बढ़ती है और गरीबों को पेट भरने के लिए यही चीजें दुर्लभ हो जाती हैं।
इन समारोहों में तन की भी हानि हो रही है क्योंकि इतने व्यंजन होते हैं व्यक्ति सभी व्यंजनों को खाने की सोचता है और वो एक दूसरे के विरोधी होते हैं जैसे गोलगप्पे- टिक्की पापड़ी के साथ ही रबड़ी इमरती का स्टाल लगा होता है  अब खट्टे के साथ दूध से बनी रबड़ी ! कोल्ड ड्रिंक-कॉफी, दूध- लस्सी, जलजीरा-आइस्क्रीम , ऐसे ही बहुत से व्यंजन खाने में एक दूसरे के विरोधी होते हैं जिनसे व्यक्ति बीमार पड़ता है।
एक तरफ देश में लोग भूख से मरते हैं दूसरी ओर इस प्रकार खाद्य सामग्री बर्बाद होती है..... जिससे मन में एक अपराध बोध जागता है लेकिन मन मसोस कर रह जाते हैं।  
सुना है अब हिन्दू+ धर्मावलम्बी भी अपने शुभ कार्यों (विशेष कर विवाह) में होने वाले भोज में मांस परोसने लगे हैं ! मदिरा को तो डिस्टिल्ड वाटर कहकर बहुत पहले से पीना पिलाना चल  रहा है .......
ऐसा शायद  इसलिए हुआ है कि हिन्दुओं को पिछले सौ डेढ़ सौ सालों से अपनी सभ्यता संस्कारों संस्कृति से शिक्षा व फिल्मो विज्ञापनों के माध्यम से दूर किया जा रहा है...  उसीका परिणाम है।
जिस संस्कृति में विवाह को धार्मिक आयोजन मानते हैं वर को नारायण और वधु को लक्ष्मी मानते हैं उनकी पूजा होती है यहाँ तक कि गणेश पूजा होने से जब तक कार्यक्रम पूर्ण होकर पारायण नहीं हो जाता तबतक समय को भी शुभ मानते हैं ऐसे में मांस पके और परोसा जाए ..... हो सकता है कुछ गंभीर प्रकार की दुर्घटनाएं इसीलिए होती हों ... कालांतर में वर वधु में अलगाव इसी कारण होता हो , विचार का विषय है । 

Monday, March 7, 2016

झूठ बोलूँगा तो कौवा काटेगा .... कसम से

अजी साहब !!! इनके तो चूहे बिल्लियों तक को शर्म आ नहीं रही ...
आप कह रहे हो इसको शर्म आनी चाहिए !!!
न जाने कौन सा नमक खाते हैं !!!
इनमे शर्म पैदाइशी होती नहीं और मरते दम तक आती नहीं ! और बेशर्मी की इनके लिए सीमा नहीं होती |
देखा नहीं एक नेता ... इनका ... पिचासी की उम्र में जबरदस्ती बाप बनाया ;
एक पैतीस साल के युवा ने !! उस नेता की जवानी के दिनों का चिटठा खोल दिया | ये नेता राज्यपाल रहते भी राजभवन में कई कन्याओं के साथ एक साथ रंगरेलियां मनाते कैमरे में कैद हो गए ...
एक और नेता था इनका ... युवा नेता .... अपनी बीवी को काट काट कर तंदूर में जला रहा था .... पकड़ा गया ... पता नही जेल में ऐश कर रहा है या घर में ,
एक तो मंत्री था .... हाँ मंत्री !!! कानून मंत्री था शायद ... अपने सुप्रीम कोर्ट के कमरे में महिलाओं को जज बनाते वीडियो बनवा बैठा दुनिया वीडियो देख कर हौ हौ करती थी लेकिन वो नेता बना टीवी पर बेशर्मी दिखता रहा .... अभी भी बेशर्म ही है दिखाई दे जाता है कभी कभी !!!
एक राजस्थान सरकार में मंत्री था इनका !! पुराना नेता.... एक नर्स की हत्या तब कबूला जब उसकी भी आपत्तिजनक् वीडियो से पहचान हुयी उस नर्स को पता नहीं जिन्दा या मुर्दा चूना भट्टी में जला दिया था !!!
एक और नेता हुए हरियाणा में ...उन्होंने अपनी एयरहोस्टेस को ही ..... नहीं छोड़ा ..... मरवा दिया !!
इनके युवा नेता और प्रवक्ता के पिताजी हरियाणा के महा बुजुर्ग नेता वियाग्रा खाकर दंड पेल रहे थे सी डी नेट पर आ गयी !!
अजी साहब अभी और हैं !!
लेकिन इनसे शर्म की उम्मीद मत करना शर्म के लिए धमनियों में शुद्ध रक्त बहना चाहिए .... जिनके धमनियों में शुद्ध रक्त है उन्हें तो ये बदनाम कर देते हैं या हंसी में उड़ा देते हैं ! क्योंकि वो चरित्र की बात करते हैं |
इनके एक पितृ पुरुष जो इनकी नजरों में बहुत महान हैं उनकी चरित्र गाथा तो क्या बखान करें !!! उसके कारण ही तो आज हमारा देश सारी समस्याओं को झेल रहा है ...
इनके आँख बंद घोड़ों को लगता है वो न होते तो देश आजाद न होता !!! जैसे सात लाख से ज्यादा क्रांतिकारी इंग्लेंड से मरने आये थे
एक और वैश्विक नेता ठहरे उन्हें कुछ नहीं कह सकते उसके लिए तो लिंक पर जाइए !!!
हो सकता है और पार्टियों में भी कोई एकाध किस्सा ऐसा ही हो लेकिन इनके यहाँ तो ये इनकी पहचान है अभी तो कई नेताओं के कारनामे ऐसे हैं कि देखते और सुनते ही बनते हैं ! 

Tuesday, February 9, 2016

ये पश्चिमी मानसिकता (या बीमारी) ही है कि "नाम और दाम" के लिए कुछ भी किया-कहा जाये सब ठीक होता है।


किसी व्यस्ततम बाजार में, सब, अपने-अपने क्रियाकलापों में व्यस्त हों भीड़ संभल कर चलने में अपना ध्यान लगाये, चलने में व्यस्त हो ।
ऐसे में किसी का भी ध्यान लोगों के साधारण क्रियाकलापों पर नहीं जाता, ऐसे में किसी ने अपनी ओर सबका ध्यान आकर्षित करना हो तो क्या करे ? जोर-जोर से चिल्लाये या कुछ अजीबोगरीब हरकतें करने लग जाये, अगर फिर भी लोग तवज्जो न दें तो ! साधारणतः हमारे-तुम्हारे जैसा व्यक्ति तो थक-हार कर चुप हो जायेगा, पर जिसे इस तरह की बीमारी हो कि लोगों का ध्यान अपने पर केन्द्रित करवाना ही हो वह नंगा होकर उल-जलूल बोलने लगेगा । और भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसा ही होता है ।
 पता लगा कि इस तरह की स्वतन्त्र अभिव्यक्ति देने वाले का तो खर्चा-पानी ही इससे चलता है जो अपनी "कमाई के लिए कुछ भी करेगा" वाली तर्ज पर वो सबकुछ करते-कहते हैं जिसे हमारे यहाँ वर्जित माना जाता है।
ये पश्चिमी मानसिकता (या बीमारी) ही है कि "नाम और दाम" के लिए कुछ भी किया-कहा जाये सब ठीक होता है ये बीमारी इतनी खतरनाक होती है कि इसके बीमार लोग अपने माता-पिता तो क्या अपने चेहरे शारीर को भी घाव दे देते हैं। इनके लिए देश केवल एक जमीन का टुकड़ा होता है ये अगर ऐसा करें तो इनकी तरफ कौन ध्यान देगा कैसे इन्हें "बुकर प्राईज" या अन्य विदेशी उपहार मिलेंगे ? कैसे इनका खर्चा- पानी चलेगा ? खर्चा-पानी चल भी जाता हो तो; कैसे इनके बीमार मन को सकून मिलेगा ?

Saturday, November 14, 2015

पञ्च मक्कार !!! ये तो अभी ट्रेलर देखा है देश ने !


दूध देने वाली #गाय की लात भी सहनी पड़ती है ये सरकार देश के लिए सही है तो इनकी गलतियाँ भी सहेंगे ... जो लोग किसी भी पार्टी के सदस्य हैं या पदाधिकारी हैं उनकी निष्ठा बदल सकती है ! उन्हें देश धर्म समाज संस्कृति सभ्यता से कुछ नहीं लेना होता, उनको ये पार्टी उनके अनुकूल नहीं देती तो वो दूसरी पार्टी में जा घुसते हैं ! और कल तक जिसको सर्वेसर्वा माना था उसे ही गरियाने लगते हैं ! लेकिन हमारे जैसे लोग देश के लिए अच्छे की सोचते हैं और इसलिए जो देश के लिए अच्छा लगे उसे समर्थन करते हैं हमारा कांग्रेस के किसी भी व्यक्ति से कोई व्यक्तिगत विरोध या झगडा नहीं है हमारा कंग्रेसिज्म से विरोध है | कई कांग्रेसी अपनी पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टी में गए हैं मैं उन्हें भी पसंद नहीं करता क्योंकि वो केवल स्वार्थी हैं और कुछ नहीं | और कांग्रेस ....... कांग्रेस के विषय में पहले भी कई बार लिख चूका हूँ .... ये पञ्च मक्कारों से ग्रस्त विचार वाली पार्टी है इसका समर्थन हम नहीं कर सकते |इसीलिए चाहे परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज हों या भाई राजीव दीक्षित जी हों हमें देश के लिए कुछ करने वाले लगे तो हम जी जान से इस आन्दोलन के साथ हो लिए | वो तो ये आन्दोलन अन्ना केजरी & कम्पनी ने (उन्हीं पञ्च मक्कारों के षड्यंत्र से; जिनका खुलासा मैं समय समय पर करता रहता हूँ इस समय भी नीचे किया है) भरमाने का प्रयास किया ! लेकिन पूर्ण सफल नहीं हुए |  स्वामीजी का नेतृत्व इसे संभाल ले गया वर्ना देश में दिल्ली वाला खेल चल रहा होता | स्वामी जी को मोदी जैसा नेता मिला आपस में बात हुयी होगी ..... जो बाद में सही भी सिद्ध हुआ है .... एकदम से बदलाव हो नहीं सकता बदलाव धीरे धीरे ही होगा |    
खैर ......
बिहार की हार तो कुछ भी नहीं भाईसाहब .....
ये तो अभी ट्रेलर देखा है देश ने ! ये असहिष्णुता ! ये दादरी ! ये सुनपेड ! ये बीफ ! ये सम्मान वापसी ! ये महंगाई ! ये साईं बाबा ! ये पूर्व सैनिकों का OROP आंदोलन और अब ये टीपू सुल्तान आदि आदि जाने क्या क्या बिना सर पैर के मामले हैं जो छत्तीस सालों से देश में व्याप्त हैं लेकिन आज तक नहीं भड़के क्यों ? 
शर्त लगा लो !
ये मोदी सरकार को पांच साल नहीं चलने देंगे !
देख लेना अगर... अगर ये केंद्र सरकार पूरे पांच साल चल जाये तो !
चल भी गयी तो ऐसे ही लंगडाते लड़खड़ाते हुए चलेगी आम जनता के मन मष्तिष्क पर कोई प्रभाव नहीं डाल पायेगी और दोबारा चुनाव लड़ने में मोदी जी को भी डर लगेगा, जीतना मुश्किल हो जायेगा जैसे अटल सरकार के बाद हुआ था | इनके अपने ही इनको हराने वाले हो जायेंगे |
इस देश को वास्तव में अगर कोई चला सकता है तो केवल #कांग्रेस !
कांग्रेस और कांग्रेस |
क्यों ?
क्योंकि इस देश में अभी स्वाभिमानी राष्ट्रवादियों की संख्या पञ्च मक्कारों  से प्रभावित लोगों से कम है और देश में पांच मक्कार भरे पड़े हैं कांग्रेस इनकी पोषक है बल्कि उसने इनके साथ छठा (M) मुसलमान को जोड़ कर इस शक्ति को इतना बढ़ा लिया कि कभी भी कहीं भी स्थिरता नहीं होने देने की शक्ति उसके पास हो गयी है ;
जब मर्जी तब दंगे करवा सकते हैं !
जब मर्जी तब किसी भी वस्तु की कालाबाजारी करवा सकते हैं !
जब मर्जी तब राष्ट्रवादियों को बदनाम कर सकते हैं राष्ट्रवाद की खिल्ली उड़ा सकते हैं |
ये "पंच मक्कार" नीचे स्लाइड में लिखे हैं !
अच्छा सोचो !
ये टीपू सुल्तान की जयंती वाला मामला क्या इससे पहले भी कभी हुआ था ?
मेरा मतलब क्या टीपू सुल्तान की जयंती कभी पहले भी मनाई गयी थी ?
नहीं ?
तो फिर अब क्यों ! इसी बार क्यों !
ये सवाल उनसे 
कोई नहीं पूछ रहा ! उलटे #राष्ट्रवादी लोगों से सवाल पूछे जा रहे हैं कि विरोध क्यों !
उकसाया जा रहा है; #गौडसे की जयंती मनाने को !  फिर उस पर बवाल काटेंगे !
खैर हम तो समझ रहे हैं ,
लेकिन आम जनता भ्रमित हो जाती है और वही कहती है जो मैंने ऊपर कहा ! कि ;
इस देश को केवल कांग्रेस ही संभा सकती है |
बिहार हार के बाद भजपा के अन्दर के विरोधी और कुछ बड़े नेताओं की भावनाओं को भड़काने के काम में भी यही पञ्च मक्कार अपने हाथ पैर घुसेड़े हुए हैं; कही दो फाड़ करवा दें !