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Thursday, June 17, 2010

"क्योंकि मैं भारत हूँ"

मैं भारत हूँ,
वर्तमान में बहुत शर्मिंदा हूँ
अपराध,भ्रष्टाचार,अनैतिकता से त्रस्त,
अपने भ्रष्ट नेताओं के कारण


फिर भी ….

मैंजिन्दा हूँ ,


"क्योंकि; मैं भारत हूँ",     


गिरता हूँ फिर उठता हूँ,
हर बार संभालता हूँ,
हर बार जलता हूँ
अपनों कि लगायी आग के कारण


फिर भी

मैं जिन्दा हूँ ,


"क्योंकि;मैं भारत हूँ" ,


मैं डरता नहीं ,मैं मरता नहीं,
मेरे पास, अतीत की संजीवनी है ;
जो संस्कृतिसंस्कारों से बनी है,
मैं कुछ समय के बाद
फिर मूर्च्छा से जागता हूँ,
अपने महापुरुषों के कारण


मैं जिन्दा हूँ
"क्योंकि मैं भारत हूँ"

5 comments:

  1. मै भारत हूँ अपने अतीत पर सर्मिंदा हूँ मैँ, इस लेख के लिऐ आपको बधाईयाँ ।
    etips-blog.blogspot.com

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  2. बेहतरीन रचना।

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  3. आप की इस रचना को शुक्रवार, 18/6/2010 के चर्चा मंच पर सजाया गया है.

    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

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